भुजंगासन के फ़ायदे और नुकसान | Advantages of Bhujangasana | भुजंगासन करने की सही विधि

भुजंगासन के फ़ायदे और नुकसान | Advantages and disadvantages of Bhujangasana | भुजंगासन करने की सही विधि

भुजंगासन के फ़ायदे और नुकसान | Advantages of Bhujangasana | भुजंगासन करने की सही विधि
भुजंगासन के फ़ायदे और नुकसान | Advantages of Bhujangasana | भुजंगासन करने की सही विधि

नमस्कार दोस्तों आज के इस नए पोस्ट में हम आपको भुजंगासन के फ़ायदे (Advantages of Bhujangasana) और नुकसान के बारे में बताएँगे. साथ ही आप यह भी जानेंगे की इस आसन को करने से क्या लाभ और क्या नुकसान हैं. इसके आलावा दो और आसन के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे. इस लेख के अंत में अपनी राय हम कमेंट बॉक्स में जरुर लिखें. तो चलिए जानकारी प्राप्त करते हैं…..

भुजंगासन किसे कहते हैं?

भुजंग सांप को कहते है। अतः फन उठाये हुए सांप के समान स्वरूप बन जाने के कारण ही इसे भुजंगासन कहा गया।

 

भुजंगासन करने की विधि-

पेट के बल सीधे लेट जायें। जिस प्रकार दण्ड निकालते हैं, पैरों की स्थिति बिल्कुल उसी तरह की रहेगी, परन्तु जांघों तक का भाग पृथ्वी पर टिका रहेगा। कोहनियां पेट के पास लायें और सांस को अन्दर भरते हुए पेट के ऊपर के भाग को ऊँचा उठाते जाएं। नाभि तक का भाग ऊपर उठना चाहिए, परन्तु नाभि पृथ्वी को छूती रहे । हाथों पर शरीर का भार न पड़ने दें। सिर इतना ऊँचा उठ जाये कि आंखें आकाश की ओर देखने में पूर्ण समर्थ हों पुनः सांस छोड़ते हुए नीचे आयें। इसी प्रकार दो-चार बार दोहरायें।

 

भुजंगासन के फ़ायदे या लाभ-

इससे स्त्री-पुरुष दोनों के गुप्तांग मजबूत होते हैं । उनका विकास भी होता है और वे रतिक्रिया में अधिक आनन्द लेने में समर्थ होते हैं । कब्ज दूर होता है। स्त्रियां गर्भधारण करने में समर्थ होती हैं। भोजन के बाद अपच तथा खट्टे डकार आदि आने समाप्त होते हैं, रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और कमर का दर्द सदा के लिए दूर हो जाता है।

 

ताड़ासन के फ़ायदे, नुकसान और करने की विधि

ताड़ासन के फ़ायदे, नुकसान और करने की विधि
ताड़ासन के फ़ायदे, नुकसान और करने की विधि

ताड़ासन में शरीर की मुद्रा ताड़ के वृक्ष के समान सीधी और लम्बी होती है। इसलिए इसे ‘ताड़ासन’ कहते हैं.

 

ताड़ासन करने की सही विधि-

दरी या कम्बल पर सीधे खड़े होकर दोनों ऐड़ियों को मिलाएँ और दोनों पंजों को 45° कोण पर रखें। सम्पूर्ण शरीर को सीधा रखें। लम्बी साँस लेकर दोनों हाथों को ऊपर ले जाएँ फिर कुम्भक लगाएँ । हथेलियों को सामने की ओर रखें। ऐड़ियों को ऊपर उठाकर पंजों के बल खड़े होकर पूरे शरीर को ऊपर की ओर तान दें।

 

यह साँस रुकने की सरलता तक करें। साँस छोड़ते हुए हाथों को नीचे लाएँ और ऐड़ियों को भूमि पर टिकाकर आसन खोल दें।

 

यह आसन भूमि पर लेटकर भी लगाया जा सकता है। दीवार के सहारे शरीर को चिपकाकर भी यह आसन लगाया जा सकता है। ताड़ासन में ध्यान- इस आसन में ध्यान लगाने से आशातीत लाभ होता है। सिद्धि प्राप्त करने के लिए इस आसन में ‘ध्यान’ लगाना उपर्युक्त होता है।

 

ताड़ासन के लाभ-

यह आसन स्त्री-पुरुषों के शरीर की लम्बाई बढ़ाने और मुटापा दूर करने के लिए अत्यन्त उत्तम है। मेरुदंड के झुकाव को सीधा करने, नाभि-पेट को सुडौल बनाने, वक्षों की सुडौलता बनाने के साथ-साथ रक्त-संचालन में लाभ पहुँचाता है। इससे कमर दर्द श्याटिका, सर्वाइकल स्पोन्टीलाइट्स आदि रोग ठीक होते हैं। इससे शरीर का स्नायुमंडल भी स्वस्थ होता है।

 

ताड़ासन करते वक्त बरती जाने वाली सावधानियाँ-

उत्तर की ओर मुँह करके या उत्तर की ओर सिर करके लेटकर यह आसन लगाना चाहिए। आसन में शरीर का संचालन धीरे-धीरे करना चाहिए।

 

विपरीतकरणी आसन करने की सही विधि

विपरीतकरणी आसन करने की सही विधि
विपरीतकरणी आसन करने की सही विधि

इस आसन का प्रभाव दुतरफा होता है। कुमारी लड़कियों अथवा विधवाओं को कामवासना से विमुख करता है, उनमें धैर्य और विवेक जाग्रत कर ब्रह्मचर्य बनाये रखने में मदद करता है, लेकिन यदि विवाहित महिलाएं इसे करें, तो उनमें नवयौवना का उत्साह और रतिक्रिया के प्रति आसक्ति फूट पड़ती है ।

 

विपरीतकरणी आसन के लाभ-

खोपड़ी और चेहरे की ओर रक्त का दबाव बढ़ने से बाल जल्दी सफेद नहीं होते और चेहरा सदा कान्तिवान् बना रहता है।

कन्धू, कूल्हे और जांघे सुडौल बनती हैं और उनमें एक विशेष आकर्षण बना रहता है। इन अंगों का मोटापा छंटता है और कब्ज तथा | गैस के दोष दूर होते हैं। इस आसन के करने से शरीर में विशेष प्रकार का सन्तुलन आता है, जिससे उन्हें गर्भ को स्थिर रखने में भी सहायता मिलती है।

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