भय को नहीं साहस को गले लगाओ- एक जोशीला लेख

भय को नहीं साहस को गले लगाओ- एक जोशीला लेख

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भोगो में रोग का डर है,उंच्च कूल में पतन का डर है,सम्मान में हिन्नता का,धन-सम्पति में राजा का, शक्ति में शत्रुओं का डर है तथा शास्त्रार्थ में वाद-विवाद का, गुणों में दुष्ट लोगों का तथा शरीर में मृत्यु का भय है.राजा भर्तृहरि

प्रत्येक मनुष्य को किसी ना किसी चीज का भय हर वक्त सताते रहता है. हम उस भय को कुछ भी नाम दें, स्वीकारें या ना स्वीकारें, लेकिन कहीं ना कहीं हमारे मन में किसी-न-किसी रूप में वह अवश्य विराजमान रहता है. कुछ भय वास्तविक होते हैं, जबकि अधिकतर डर सांसारिक मिथ्या या काल्पनिक होते हैं.वास्तविक किस्म के डर में शेर से डरना,ऊंचाई पर खड़े हो कर निचे झाकने पर गिर कर मरने का डर, कोई जोखिम पूर्ण काम करने पर भय लगना. जबकि सांसारिक मिथ्या काल्पनिक भयों में अपने भविष्य के प्रति आशांकित रहना, किसी व्यक्ति विशेष से व्यर्थ डर कर बात करना, किसी सामान्य काम को करने से डरना, अपनी बात कहने या रखने से डरना. इनके अलावा व्यक्ति-व्यक्ति के मुताबिक भय कई प्रकार के एवं कई तरीके के हो सकते हैं एंव ये जाने-अनजाने डर हर किसी को लगे रहते हैं. इन डरों के कारण कई लोग पुरे जिंदगी कुछ बन नहीं पाते, या कुछ उल्लेखनीय कर नहीं पाते, जबकि सामान्य साहस से वहीँ काम जो लोग कर लेते हैं, ओ जीवन में सुखों एवं सम्मान को प्राप्त करते देखे जाते हैं.

गीतासार में कहा गया है- “तुम क्यों व्यर्थ किसी से डरते हो, आत्मा न पैदा होती है न मरती है.
डरना मौत से कम नहीं, डर की एक मात्र औसधी साहस है. जब भी आपको किसी व्यक्ति से या कोई कार्य करने से भय की अनुभूति हो, अपने मन में साहस जुटाएं तथा लग जाएँ काम को पूरा करने में. याद रखिये इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं है. छोटे बड़े की केटेगरी मनुष्य के दिमाग की एक उपज है.

इस दुनिया में डरे हुए लोगों ने कोई भी युद्ध नही जीता है. जिस व्यक्ति ने अपने भयों पर काबू कर लिया, वह संसार में सुखों को सच में पा सका.
जब भी आपको डर लगे या किसी का भय सताए तो निम्न बातों पर गौर करें:-

  • क्या किसी एक घटना के वजह से आपने कोई काम करना बंद कर दिया है ? ऐसी घटनाओं में शहर में दो-तीन बार लूटपाट हो जाने, चक्काजाम या गुंडागर्दी अथवा अन्य इसी प्रकार की कोई घटना हो सकती है. यदि ऐसा है, तो अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें. जरुरी नही की किसी या किन्ही गिनती के लोगों के साथ हुई कोई घटना शहर में सभी लोगों के साथ ही होगी. याद रखिये- सावधानी अलग चीज है, डर अलग.

    किसी काम को करने में, कहीं जाने में, किसी से बात करने में या कुछ पूछने में आपको संकोच या हिचकी होती है, तो कही-न-कही उसमें भय भी शामिल रहता है.उस भय का कारण खोजिये और जितनी जल्दी हो सके उसे मार डालिए.

  • कभी भी किसी से बात करने में, कुछ पूछने में संकोच नहीं कीजिये, जो भी पूछना है. बस पूछ डालिए. सामने वाला भी आप ही की तरह हड्डी -मांश का बना हुआ इंसान है. फिर डरने की क्या बात ?
  • जिस कार्य से आपको डर लगे- जैसे सीढियों पर चढ़ने से, सड़क पार करने से, गाडी चलाने से या किसी से बातर करने से, तो आप बार बार उसी को कीजिये. चाहे कितना भी दिक्कत हो, आप बस करते जाइए. एक दिन डर जरुर ख़त्म होगा.
  • मन में साहस की कमी लगे तो वीर-पुरुष, महापुरुषों की गाथाएं पढ़े. अपने आप को मजबूत बनाने के लिए जोशीले गीत गुनगुनाएं. मुश्किल कोई आ जाये तो, परबत कोई टकराए तो

    ताक़त कोई दिखलाये तो, तूफ़ान कोई मंडलाये तो

    मुश्किल कोई आ जाये तो परबत कोई टकराये तो

    बरसे चाहे, अम्बर से आग, लिपटे चाहे, पैरों से नाग 

    पायेगा जो लक्ष्य है तेरा,लक्ष्य को, हर हाल में पाना है.

  • अधिकतर डर हमारे मस्तिष्क की कमजोरी ही होती है. अतः कोई भी काम डर में, भय में रह कर ना करें.

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आप जिस भी काम को करने की सोंच रहे. जिसमे आपका दिल आपका साथ दे रहा है पर दिमाग उसे रोक रहा है तो उस वक्त दिल की सुने, भय को मारें और उस काम को कर डालें. डर के आगे जीत है.

 

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