ईमानदारी पर कुछ अनमोल सुविचारों का संग्रह

ईमानदारी पर कुछ अनमोल सुविचारों का संग्रह

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नमस्कार पाठकों, आज के इस लेख में हम कुछ ईमानदारी पर आधारित सुविचारों को आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूँ, इस लेख ईमानदारी पर कुछ अनमोल सुविचारों का संग्रह” पर अपनी प्रतिक्रिया कमेंट के माध्यम से जरुर दीजियेगा

→ईमानदारी वह चीज है जिस पर मनुष्य की प्रतिष्ठा निर्भर करती है।
– श्रीराम शर्मा आचार्य

→ईमानदारी की मिल्कियत के सामने दुनिया की तमाम संपत्तियां तुच्छ हैं। इससे श्रेष्ठ कोई सम्पत्ति नहीं।
– शेक्सपीयर

→ईमानदार मनुष्य स्वभावतः स्पष्टभाषी होता है। उसे अपनी बातों में नमक मिर्च लगाने की जरूरत नहीं होती।

प्रेमचंद

→ईमानदार होना दस हजार में से एक होना है।

शेक्सपीयर

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ईमानदारी पर कुछ अनमोल सुविचारों का संग्रह

→ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है।

अंग्रेजी लोकोक्ति

→बातचीत का प्रथम अंश है सत्य, द्वितीय सुंदर सूझबूझ, तृतीय सुंदर विनोद और चतुर्थ वाक चातुर्य

सर डब्लयू टेम्पिल

→ईमानदारी के बराबर और कोई भी गुण अभी तक संसार में खोजा नहीं जा सका। असंख्य लोग ईमानदारी के बजाय धोखे के नकली सिक्के को चलाने में अपने जीवन को बिगाड़ चुके हैं।

स्वेट मार्डेन

→ईमानदार आदमी ईश्वर की सर्वोत्तम रचना है।

पोप

→किसी के मरणोपरान्त मिलने वाला कोई धन ईमानदारी से अधिक मूल्यवान नहीं है।

शेक्सपीयर

→ईमानदार व्यक्ति न चाहते हुए भी प्रसिद्ध हो जाता है।

रूजवेल्ट

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→वह व्यक्ति जो अपने खून-पसीने की कमाई से रोजी हासिल करता है, और जो भी वह कमाता है, उसमें दूसरों को हिस्सा देता है, ऐसे व्यक्ति को ईमानदार कहना चाहिए।

गुरु नानक

→आदमी को चाहिए कि वह पहले ईमानदार और सज्जन बने। बाद में शिष्टाचार और संतोष की पालिश चढ़ाए।

कन्फ्यूशियस

→ ईमानदार बन कर आप अपनी बिलकुल अलग पहचान बनाते हैं। आपके व्यक्तित्व की यह चमक किसी की लाख कोशिशों के बाद छिपाए नहीं छुपती।

वेदान्त तीर्थ

→बुजुर्गों से प्राप्त की हुई कोई भी वस्तु इतनी मूल्यवान नहीं होती जितनी कि ईमानदारी ।

शेक्सपीयर

→न्यायाधीश को तीक्ष्ण बुद्धि होने, अधिक योग्य, प्रदर्शनीय होने, सम्मानित और पूर्ण विश्वस्त होने के बजाय अधिक विचारपूर्ण होना चाहिए। इससे भी ऊपर ईमानदारी और सच्चाई उनका असली गुण है।
फ्रांसिसी बेकन

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→जिसका ईमान नहीं वह इंसान नहीं, ईमान न बेचो, भले ही सब बेच दो।
सुकरात

→ यदि तुम्हारा हृदय ईमान से भरा है। तो एक शत्रु क्या, सारा संसार आपके सम्मुख हथियार डाल देगा।

स्वामी रामतीर्थ

→ईमानदारी वैभव का मुंह नहीं देखती, वह तो मेहनत के पालने पर किलकारियां मारती है और सन्तोष पिता की तरह उसे देखकर तृप्त हुआ करता है।

रांगेय राघव

→ईमान सभी प्रकार की हिसाओं का नियमन करता है। मोमिनो को हिंसा न करने दो।

हजरत मोहम्मद पैगम्बर

→जो कहता है-ईमानदारी नामक कोई वस्तु नहीं है, वह स्वयं धूर्त है।

बर्कले

→जो वाणी से ईमानदार नहीं, वह सब कामों में बेईमान हो सकता है।

अज्ञात

→जो व्यक्ति छोटे-छोटे कामों कोईमानदारी से करता है, वही बड़े कामों को भी ईमानदारी से कर सकता है

सैमुअल स्माइल्स

→ईमानदार का हर काम खुलेआम होता है।

चाणक्य

→उस तुच्छ व्यक्ति का चित्त कभी शान्त नहीं हो सकता, जिसने पैसे की खातिर अपना ईमान बेच दिया।

शेखसादी

→ईमान वाले वे हैं जो अपनी अमानतों और प्रतिज्ञा का ध्यान रखते हैं और अपनी नमाजों की रक्षा करते हैं।
हजरत मोहम्मद पैगम्बर

→ईमानदार होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप बेईमानी से किसी भी तरह से हारें। ऐसी परिस्थिति में ईमानदार को यमराज से भी ज्यादा क्रूर हो जाना चाहिए।
वेदान्त तीर्थ

→ईमानदारी स्वयं अपना परिचय है।

स्वामी गोविन्द प्रकाश

→ईमानदार कभी बेईमान हो नहीं सकता, यही बात बेईमान के साथ भी लागू होती है।

के. हैरी

→ईमानदार होने का अर्थ है, सब खुला है, कोई भय नहीं, किसी से कोई अपेक्षा नहीं, इसीलिए ईमानदार का चेहरा प्रसन्नता से जगमगाता रहता है।

किशोर स्वामी

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