Padmasana Yoga | पद्मासन योग से पेट की सभी बिमारियों से छुटकारा

पद्मासन योग से पेट की सभी बिमारियों से छुटकारा
Image Credit: The Indian Med

पद्मासन योगा- योगासनों में यह प्रमुख आसन है। इसमें कोई विशेष कष्ट नहीं होता और देखने में भी यह बहुत आसान लगता है, परन्तु सामान्य व्यक्ति के लिए भली प्रकार पद्मासन लगाकर पाँच-दस मिनट तक बैठना कठिन है। ‘पद्म’ का अर्थ कमल है। अनेक योगिकों का कथन है कि इस आसन को पूरा होने पर शरीर की मुद्रा एक कमल जैसी होती है, इसलिए इसे पद्मासन कहते हैं। यह भी अर्थ ठीक है, लेकिन वस्तुतः इसे पद्मासन इसलिए कहते हैं कि इसमें बैठकर मनुष्य अपनी चेतनारूपी कमल को विकसित करता है।

आज के इस लेख में हम पद्मासन के साथ साथ उत्थित पद्मासन बद्ध पद्मासन के बारे में जानेंगे और उससे होने वाले फ़ायदे के बारे में जानेंगे। अगर आप हिंदी में लेखों को पढना पसंद करते हैं तो “अनमोलसोच डॉट इन” का Bell Notification जरुर ऑन कर लें इसके साथ ही आप हमारे टेलीग्राम चैनल से भी जुड़ सकते हैं।

पद्मासन योग- साधना का एक विशिष्ट आसन है। ऋषि-मुनि इसी आसन में बैठकर ध्यान लगाते हैं और प्राणयाम करते हैं। ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिए भी इसी आसन में बैठकर मन्त्रों का जाप किया जाता है और मनोरथ पूर्ण होने के लिए भी इसी आसन पर बैठकर ध्यान किया जाता है। इसमें शरीर की उन सभी पेशियों का व्यायाम होता है, जो प्रयोग में न आने के कारण दृढ़ हो गई होती है। इसके साथ ही यह मस्तिष्क में शुद्ध रक्त प्रवाहित करने की प्रक्रिया तेज कर देता है। यही कारण है कि ध्यान लगाने के लिए इस आसन को सर्वोत्तम माना जाता है।

पद्मासन करने की विधि- भूमि पर बिछे कम्बल या दरी को चार परतों में मोड़ कर बिछा लें। उस पर दोनों टाँगों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाइए, अब दायी टाँग को पिंडली और पैरों से पकड़कर धीरे-धीरे घुटने पर से मोड़े। 90° के कोण के बाद टाँग को मोड़ने में कठिनाई होती है। इसके लिए धीरे-धीरे अभ्यास करें चाहे इसमें कई दिन क्यों न लग जाएँ। जबरदस्ती करने की कोशिश न करें।

Padmasana Yoga | पद्मासन योग से पेट की सभी बिमारियों से छुटकारा

अब दाहिने पैर के गठ्ठे और पंजे को चित्रानुसार पकड़ें और दाहिनी टाँग को थोड़ा ऊपर उठाते हुए अन्दर की ओर खींचिए। इसके अभ्यास में भी समय लगता है। दाहिने पैर की ऐड़ी बाईं जाँघ की जड़ कस लें। अब बाई टाँग को घुटने से मोड़कर गठ्ठे को बाएँ हाथ से तथा पंजे को दाहिने हाथ से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठाइए। बाएँ पैर की ऐड़ी को दाई जाँघ की जड़ में सटा दीजिए। फिर ज्ञानमुद्रा में ऊँगलियों को करके घुटनों पर रखिए। कमर, पीठ, रीढ़ गर्दन सीधी रखिए।

पद्मासन में ध्यान- पद्मासन की अवस्था मानसिक एकाग्रता के लिए सर्वोत्तम समझी जाती है। इसमें ‘ध्यान’ लगाकर दार्शनिक, व्यवसायिक, राजनीतिक पारिवारिक किसी भी जटिल समस्या का हल ढूंढा जा सकता है। शर्त केवल यह है कि आपको इस आसन में ध्यान को एकाग्र करने का पूर्ण अभ्यास हो । त्राटक के अभ्यास में भी इसी आसन का प्रयोग किया जाता है।

त्राटक साधना के कई सोपान (चरण) हैं। केवल किसी बिन्दु पर ध्यान को एकाग्र करके ही अप्रत्याशित मानसिक शक्ति प्राप्त होती है । इसके पश्चात् आँखें बन्द करके अंधेरे में ज्योति बिन्दु को खोजने का अभ्यास किया जाता है । इसके सात सोपान हैं। इसके बाद इस ध्यानाभ्यास का प्रयोग कुंडलिनी को जागृत करने में किया जाता है ।

पद्मासन के लाभ- यदि आप केवल पद्मासन लगाकर व्यायाम करते हैं और ध्यान नहीं लगाते, तो आपको वात-रोग, पेट-रोग, गठिया, कब्ज आदि रोगों में आशातीत लाभ होगा। यदि इस आसन में ध्यान लगाते हैं, तो इसके असीमित हैं। ध्यान के एक उच्च स्तर पर आपमें अलौकिक शक्तियों का समावेश हो सकता है। शरीर की सुधड़ता, कान्ति, दीर्घ यौवन सहज में ही प्राप्त होते हैं।

पद्मासन करने में सावधानियाँ- उत्तर की ओर मुँह करके न बैठें। समतल भूमि पर आसन लगाएँ । मोटे थुलथुले व्यक्ति को पहले शरीर को सुडौल बनाने और मोटापा दूर करने वाले आसनों का अभ्यास करना चाहिए । यह आसन थोड़ा कठिन है। किसी काम में जल्दबाजी न करें। प्रत्येक पैर को मोड़ने का अभ्यास धीरे-धीरे करें। रात में दोनों पैरों के गठ्ठे पर सरसों के तेल की मालिश करें। पहले 5 सेकेण्ड से प्रारम्भ करके सामान्य साधक को इस आसन को 15 मिनट तक करना चाहिए ।

उत्थित पद्मासन (Utthit Padmasana Yoga)

उत्थित पद्मासन करने की विधि- पद्मासन में बैठ जायें। दोनों हाथों की हथेलियां दोनों ओर से भूमि पर टिका दें। दोनों हाथों पर जोर डालते हुए शरीर को धरती से थोड़ा ऊपर उठायें। कुछ लोग दोनों हाथों को सामने की ओर टिकाकर तथा घुटनों को छाती की ओर उठाकर सारे शरीर का भार दोनों हाथों पर डाल देते हैं। इसीलिए इसे ‘उत्थित पद्मासन’ कहते हैं। इस आसन की स्थिति शरीर को दोनों हाथों पर तुला के समान तोलने की होती है, अतः कुछ विद्वान इसे ‘तुलासन’ भी कहते हैं।

पद्मासन योग से पेट की सभी बिमारियों से छुटकारा

उत्थित पद्मासन के लाभ- इस आसन से मेरुदण्ड सीधा और लचीला बनता है और पेट सम्बन्धी रोग दूर होते हैं तथा हाथों की मांसपेशियां दृढ़ होती हैं।

बद्ध पद्मासन (Baddh Padmasana Yoga)

पद्मासन योग से पेट की सभी बिमारियों से छुटकारा
Image Credit: Hindi Samachar

 

बद्ध पद्मासन की विधि- पद्मासन में पृथ्वी पर बैठ जायें और दोनों हाथों को पीठ के पीछे से जाकर दायें हाथ से बायें पैर का पंजा और बायें हाथ से दायें का पंजा चाहिए। पकड़ लें। कन्धे तथा शरीर का सारा भाग सीधा तना हुआ रहना चाहिए।

लाभ- यह आसन पद्मासन से भी अधिक लाभदायक है और इसमें भुजाएं, नितम्ब और पिण्डलियां मजबूत होती हैं। इन अंगो की मांसपेशियों की अच्छी मालिश हो जाती है, जिससे इनमें कभी अकड़ाव नहीं आता। कठिन होने से इसके कारण इस आसन का अभ्यास धीरे-धीरे ही बढ़ायें।

उत्थित व बद्ध पद्मासन को करने में सावधानियाँ- उत्तर की ओर मुँह करके न बैठें। समतल भूमि पर आसन लगाएँ । मोटे थुलथुले व्यक्ति को पहले शरीर को सुडौल बनाने और मोटापा दूर करने वाले आसनों का अभ्यास करना चाहिए । यह आसन थोड़ा कठिन है। किसी काम में जल्दबाजी न करें। प्रत्येक पैर को मोड़ने का अभ्यास धीरे-धीरे करें। रात में दोनों पैरों के गठ्ठे पर सरसों के तेल की मालिश करें। पहले 5 सेकेण्ड से प्रारम्भ करके सामान्य साधक को इस आसन को 15 मिनट तक करना चाहिए ।

आप इसे भी पढ़ सकते हैं:-

  1. सुखासन व शवासन के फ़ायदे सुनकर चौक जायेंगे
  2. स्टीफन हॉकिंग के अनमोल विचार
  3. अनमोल विचारों के साथ दिन की शुरुआत
  4. गुरु गोबिंद सिंह के 41 अनमोल वचन

प्रिय पाठकों, आशा करता हूँ आपको यह लेख पसंद आया होगा। हम आगे भी ऐसे ही लेख हर रोज आपके लिए लाते रहेंगे। अगर आप भी लिखने के शौक़ीन हैं और अपने विचार दुनिया के कोने कोने तक पहुँचाना चाहते हैं तो आप इस वेबसाइट के द्वारा पहुंचा सकते हैं। अपने लेखों को आप हमारे ईमेल पता पर भेज सकते हैं। हमारा ईमेल पता हैं :- [email protected]

आपके बहुमूल्य समय के लिए धन्यवाद्!

अपने दोस्तों के साथ Facebook और WhatsApp पर जरुर शेयर करें!

 

5/5 - (1 vote)
Sharing Is Caring:

नमस्कार दोस्तों, मैं "Raju Kumar Yadav" Blogger, Content Writer, Web Developer और YouTuber हूँ। आप हमारे इस ब्लॉग पर इनफार्मेशनल, प्रसिद्ध हस्तियाँ, मनोरंजन, सेहत और सुंदरता आदि पर आधारित लेखों को पढ़ सकते हैं।


Leave a Comment