Pneumonia Treatment: निमोनिया (फुफ्फुसदाह) का 100% कारगर उपचार, रोग की पहचान व होम्योपैथिक इलाज़

Pneumonia Treatment: निमोनिया (फुफ्फुसदाह) 100% कारगर उपचार

नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हम Pneumonia जैसी भयंकर रोग के बारे में जानेंगे और इस रोग का शुरुआत लक्षण क्या है यह भी जानेंगे। इस रोग का घरेलु उपचार, आयुर्वेदिक उपचार और होम्योपैथिक इलाज व दवाओं के बारे में जानेंगे। आज का हमारा टॉपिक “Pneumonia Treatment: निमोनिया (फुफ्फुसदाह) का 100% कारगर उपचार, रोग की पहचान व होम्योपैथिक इलाज़” है। आशा करता हूँ यह जानकारी आपको बहुत ही लाभकारी साबित होगा। चलिए जानकारी को विस्तार से प्राप्त करते हैं।

Pneumonia (निमोनिया) रोग क्यों होता है?

Pneumonia Treatment: निमोनिया (फुफ्फुसदाह) 100% कारगर उपचार, रोग की पहचान व होम्योपैथिक इलाज़
Pneumonia Treatment: निमोनिया (फुफ्फुसदाह) 100% कारगर उपचार, रोग की पहचान व होम्योपैथिक इलाज़

यदि किसी स्त्री या पुरुष के फेफड़े में प्रदाह (जलन होना) हो जाता है, तो उसे निमोनिया (Pneumonia) कहा जाता हैं। इस बीमारी में शुरू में ठंड लगती है फिर धीरे-धीरे फेफड़े में सूजन आ जाती है। सांस लेने में बहुत तकलीफ होती है और कुछ दिनों के बाद कफ़ बनना शुरू हो जाता है।

यदि दोनों फेफड़ों में सूजन आ जाती हैं, तो उसे डबल निमोनिया (Double Pneumonia) कहते हैं। यदि रोग भयंकर हो जाता है, तो फेफड़े साफ नहीं होते हैं और उनमें कफ़ बढ़ जाता है। रोगी की हालत धीरे-धीरे खराब होती चली जाती है। उसके हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं और उसकी मृत्यु हो जाती है।

निमोनिया रोग की पहचान क्या है?

दोस्तों, छाती में कफ़ जमा हो जाने के कारण सांस की गति बढ़ जाती है। सांस लेते समय छाती में कफ़ की आवाज आती है। पसलियों के निचले हिस्से में गड्डा पड़ने लगता है। आंखें चढ़ जाती हैं और चेहरा फीका पड़ने लगता है। रोगी को बड़ी बेचैनी होती है। उसके होंठ नीले पड़ जाते हैं। पसलियों में दर्द होता है। जीम सूखकर काली-सी पड़ जाती है।

इस रोग का घरेलू उपचार क्या है?

  • रोगी को रोज सुबह, दोपहर तथा शाम को 2 रत्ती हींग, तीन चार मुनक्कों में भर कर खिलाएं। लगभग एक सप्ताह में निमोनिया ठीक हो जाता है।
  • रोगी की छाती पर सरसों के तेल में कपूर तथा तारपीन का तेल मिलाकर मलें।
  • तुलसी के 20 हरे पत्ते, 5 काली मिर्चे, 3 लौंगें, दो चुटकी हल्दी और एक गांठ अदरक । सबको लेकर एक कप पानी में उबलने के लिए रख दें। पानी जब आधा कप बचा रह जाए, तो इस काढ़े को दो-बार में पिएं। लगभग 10 दिन तक इस काढ़े का सेवन करने से निमोनिया का रोग जाता रहता है।
  • रोगी के शरीर में पाचन-क्रिया प्रभावित होती है, इसलिए सीने तथा पसलियों पर शुद्ध शहद की मालिश करें। थोड़ा-सा शहद गुनगुने पानी में डालकर रोगी को पिलाएं।
  • लहसुन कुचलकर उसका एक चम्मच रस गर्म पानी में डालकर रोगी को दिन में दो बार पिलाएं।
  • अदरक और तुलसी का रस एक चम्मच शहद के साथ दें।

निमोनिया का आयुर्वेदिक चिकित्सा

  • एक चुटकी फूला सुहागा एक चुटकी फूली फिटकिरी, एक चम्मच तुलसी का रस, एक चम्मच अदरक का रस, आधा चम्मच पान के पत्तों का रस सबको मिलाकर शहद के साथ सुबह-शाम 1 सेवन करें।
  • तेजपात, बड़ी इलायची, नागकेसर, कपूर, शीतल चीनी, अगर, लॉग इन सबको मिलाकर तथा काढ़ा चनाकर सुबह-शाम पिएं।
  • तुलसी की पत्तियों का रस, सोंठ, काली मिर्च तथा पीपल का चूर्ण सब बराबर की मात्रा में लेकर सेवन करें।
  • आंवला, जीरा, पीपल, कौंच के बीज तथा हरड़। इन सबको 10-10 ग्राम लेकर कूट-पीसकर छान लें। फिर इस चूर्ण में से थोड़ा-सा चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करें।
  • चन्द्रामृत रस 1.5 ग्राम, यवाक्षार 1 ग्राम तालीशादि चूर्ण 1 ग्राम 12 ग्राम शर्बत लिसोड़ा व 12 ग्राम शर्बत वासा में मिलाकर रख लें व बार-बार चाटें।
  • श्वासकास चिन्तामणि रस 125 मि. ग्राम दिन में 3 बार मधु से लें।
  • पंचगुणा तेल का छाती पर अभ्यंग करें।
  • बलगम पतला करने के लिए चन्द्रामृत रस 125-150 मि. ग्राम की मात्रा में 3 बार लें।

Pneumonia का होम्योपैथिक चिकित्सा

  • छाती में पीड़ा तथा चुभन, खांसी आने के समय छाती में दर्द, रोगी छाती को दबाकर बैठ जाए, दाई तरफ के फेफड़े में सूजन, खून मिला लसलसेदार कफ़, वमन, सिर दर्द, बेचैनी, बुखार के कारण घबराहट, लेटने से कुछ आराम। इन सब लक्षणों में “ब्रायोनिया” दें।
  • पानी में देर तक भीगने से या ठंड लगने के कारण निमोनिया की शिकायत, सूखी खांसी, रात में खांसी का बढ़ना, सांस लेने में कष्ट। इन सब लक्षणों में “रस टाक्स” दें।
  • सर्दी, कफ़ लगने से सीने में धड़धड़ाहट, लसलसेदार कफ़, अधिक मात्रा में कफ़ निकलना, कंठ में जलन लेटते ही खांसी का बढ़ना, प्यास अधिक लगना, बेचैनी। इन सब लक्षणों में “एमोनम्यूर” दें।
  • तेज खांसी का दौरा, सांस लेने में तकलीफ, लसलसेदार तथा खून में मिला कफ़, बेचैनी, बुखार, सिर तथा शरीर में दर्द, किसी भी करवट लेटने पर चैन नहीं। इन सब लक्षणों में “फासफोरस” दें।
  • खांसी के कारण खो-खों की आवाज, सांस नली का भरा रहना, पके कफ़ का आसानी से बाहर न निकलना, दमा की तरह कफ़ निकलना, छाती व शरीर में दर्द। इन लक्षणों में “कैलिब्राहक्रीम” नामक दवा दें।
  • छाती में कफ़ का भरा रहना, गले में घरघराहट, सांस की भयंकर तकलीफ, निमोनिया की दूसरी हालत में रोगी की दशा बराबर बिगड़ती चली जाए, अधिक मात्रा में कफ़ निकलने पर खांसी का न घटना, दायां फेफड़ा ठंडा, आक्रांत, पीले रंग का कफ़ निकलने पर भी खांसी कम न होना, दाएं फेफड़े में सर्दी, सुबह 4 बजे तक ज्वर, दोपहर को ज्वर का बढ़ना-इन लक्षणों में “लाइकोपोडियम” दें।
  • छाती में काफी कफ़ का जमाव, कफ़ का बाहर न निकलना, छाती में अधिक दर्द तथा घरघराहट, सांस लेने में कष्ट, फेफड़ों में शोय, दाई तरफ का निमोनिया, पुराना बोइकाइटिस, बेचैनी, प्यास अधिक। इन सब लक्षणों में “सेवेगा” दें।
  • गले में घरघराहट, छाती में कफ़ का भारी जमाव, कफ के निकलने में कठिनाई, लंबी तथा गहरी सांस छोड़ना, सोने में कठिनाई, फेफड़े का पक्षाघात इन सब लक्षणों में “ओपियम” दें।
  • निमोनिया की शुरू की हालत में तेज बुखार, फेफड़े में खून का जमा होना, सांस लेने में कष्ट-इन लक्षणों में रोगी को “विरेट्रमविरिड” सुबह-शाम दें।
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भोजन तथा परहेज क्या करें?

  • चिकनाई वाले पदार्थ जैसे घी-तेल आदि, व्यायाम, शारीरिक या मानसिक परिश्रम, मैथुन, ठंडे पानी को पीना, क्रोध, बाहर की हवा, दिन में सोना, दूध तथा दूध से बने गरिष्ठ पदार्थों का सेवन छोड़ देना चाहिए।
  • पाचक चीजें खाएं तथा पूर्ण विश्राम करें।
  • परवल, तोरई, करेला, सेब, अनार, पालक या कुलथी का रस, जी या गेहूं की सादी रोटी आदि का सेवन करें। दोपहर के समय गाय के दूध में अदरक डालकर लें।
  • पानी उबालकर रख लें। इसी पानी को ठंडा करके घूंट-घूंट पिएं। खाने के बाद आठ-दस कदम अवश्य टहलें । दूध में चीनी या शंकर की जगह शहद का प्रयोग करें।
  • खटाई, पीठी तथा मैदे की मिठाई, तरबूज, मांस-मछली तथा पान का सेवन न करें।

FAQs

निमोनिया होने का क्या कारण है?

Pneumonia एक फेफड़ों का संक्रमण है जिसके वजह से फेफड़ों में हवा की थैली में सूजन आ जाती है। निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस और कवक सहित विभिन्न प्रजातियों के कारण हो सकता है।

निमोनिया कितने दिनों तक रहता है?

निमोनिया सांस से Related एक गंभीर बीमारी है जो मौसम बदलने सर्दी लगने से अक्सर हो जाती है। बदलते मौसम में बच्चों की देखभाल करना बेहद जरूरी है। बच्चों में निमोनिया आमतौर पर वायरल से होता है जो 10-12 दिनों में ठीक भी हो जाता है।

निमोनिया रोग किसकी कमी से होता है?

निमोनिया मुख्य रूप से बैक्टीरिया अथवा वायरस के द्वारा होता है. आम तौर पर फफूंद और परजीवियों द्वारा होता है।

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अगर निमोनिया हो जाए तो क्या करना चाहिए?

यदि हम निमोनिया संक्रमण के ट्रीटमेंट की बात करें तो य​ह बीमारी की स्थिति, रोगी की उम्र पर भी निर्भर करता है। हालांकि चिकित्सकों द्वारा एंटीबायोटिक्स, खांसी कम करने की दवाएं, बुखार एवं दर्द कम करने की दवाएं दी जाती हैं जिससे की  रोगी को आराम मिल सके।

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Note: यह लेख मात्र आपके जानकारी के लिए है। इसमें बताएं गए होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल करने से पहले एकबार डॉक्टर से परामर्श जरुर लें. घरेलु उपचार को आप बताये गए गए विधि के अनुसार कर सकते हैं।

धन्यवाद्:)

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