Today Motivational Thoughts | अनमोल विचारों के साथ दिन की शुरुआत

Today Motivational Thoughts | अनमोल विचारों के साथ दिन की शुरुआत

Today Motivational Thoughts: नमस्कार पाठकों, लोग जीवन में कर्म को महत्व देते हैं, विचार को नहीं। ऐसा सोचने वाले शायद यह नहीं जानते कि विचारों का ही स्थूल रूप होता है कर्म अर्थात् किसी भी कर्म का चेतन अचेतन रूप से विचार ही कारण होता है। जानाति, इच्छति, यतते- जानता है (विचार करता है), इच्छा करता है फिर प्रयत्न करता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसे आधुनिक मनोविज्ञान भी स्वीकार करता है। जानना और इच्छा करना विचार के ही पहलू हैं।

आपने यह भी सुना होगा कि विचारों का ही विस्तार है आपका अतीत, वर्तमान और भविष्य। दूसरे शब्दों में, आज आप जो भी हैं, अपने विचारों के परिणामस्वरूप ही हैं और भविष्य का निर्धारण आपके वर्तमान विचार ही करेंगे। तो फिर उज्ज्वल भविष्य की आकांक्षा करने वाले आप शुभ-विचारों से अपने दिलो-दिमाग को पूरित क्यों नहीं करते।

  • दान से पुण्य बढ़ता है, संदर्भ से बैर का बढ़ना रोका जाता है।

-महात्मा बुद्ध

  • धन के मद ने किसको टेढ़ा नहीं कर दिया।

-तुलसीदास

  • धर्म की शिक्षा दिए बिना किसी को शिक्षित करने का अर्थ उसे एक चतुर शैतान बनाना है।

-विनोबा भावे

  • धर्म के कट्टरपन पर गर्व करना लज्जा की बात है।

-शरतचंद्र

  • धर्म छिलका है और अध्यात्म केला। कई बार व्यक्ति के हाथ में केवल छिलका रह जाता है। धर्म वह है जो बाहर दिखाई नहीं देता है, कर्मकांड की परत नियम और अभ्यास मात्र, जबकि फल तो अध्यात्म है। वहीं आंतरिक चीज है।

-श्री श्री रविशंकर

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  • धनिकों के लिए दूसरी निधियां हैं परंतु सज्जनों के लिए गुणी मनुष्यों की समीपता ही श्रेष्ठ निधि है।

-श्री हर्ष

  • धन जिनका गुलाम है, वे बड़भागी है और धन के जो गुलाम हैं, वे बड़े अभागे हैं।

-शेक्सपीयर

  • धन की तीन ही गतियां होती हैं दान, भोग और नाश। जो दान नहीं देता, भोग भी नहीं करता उसके धन की तीसरी गति होती है नाश।

-हितोपदेश

  • धर्म ही एक ऐसा तत्व है, जिससे व्यक्ति आत्मिक सुख और शान्ति को प्राप्त कर सकता है।

-युवाचार्य महाश्रमण

  • धर्म का भले ही नाश हो रहा हो, जातीय जीवन भले ही रसातल को जा रहा हो, देव-मन्दिरों की भले ही ईंट से ईंट बज रही हो, परंतु नीच प्रवृत्ति का व्यक्ति अपनी स्वार्थ निद्रा से नहीं जागता

-गुरु गोविन्द सिंह

  • धन से चाहे आदमी का जी भर जाए, प्रेम से तृप्ति नहीं होती। ऐसे कान बहुत कम हैं जो प्रेम के शब्द सुनकर फूल न उठे।

-प्रेमचंद

  • धन और रूप से संपन्न होने पर भी शील के अभाव में मनुष्य फल और पुष्पों से युक्त होने पर भी कांटों से भरे हुए वृक्षों की भांति है।

-डिजरायली

  • धन खोकर अगर हम अपनी आत्मा को पा सकें, तो यह कोई महंगा सौदा नहीं है।

-प्रेमचंद

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  • धारणा की दृढ़ता और उपदेश की पवित्रता यह दोनों मिलकर अवश्य बाजी मार लेते हैं।

-स्वामी विवेकानंद

  • धन्य है, सराहना का पात्र है वह इंसान, जिसे विवेक मिल गया है, जिसने ज्ञान को वश में कर लिया है। ज्ञान की प्राप्ति चांदी से श्रेष्ठ है और सोने से बढ़कर

-नीतिवचन

  • धुआं आसमान से शेखी बघारता है और राख पृथ्वी से कि वह अग्नि वंश के हैं।

-रवीन्द्रनाथ ठाकुर

  • धनी बेवकूफ उस सूअर के समान है, जो अपनी ही चर्बी के कारण घुट मरता है।

-कन्फ्यूशियस

  • धर्म से सहिष्णुता, सत्यता, विश्वास और भावुकता का निर्माण होता है।

-हितोपदेश

  • धर्म का व्याख्यान सुनने पर, श्मशान जाने पर, रोगियों और दुःखियों को देखने से जो अनुभव उत्पन्न होता है, वह यदि स्थायी रहे तो इस संसार में सभी व्यक्ति योगी हो जाएं।

-चाणक्य

  • धन-धान्य के उपयोग में विद्या प्राप्त करने में, भोजन और नीति में, जो लज्जा का त्याग कर देता है, वह सुख पाता है

-चाणक्य

  • धन न रहने पर इंसान जब जरूरतों का निवारण नहीं कर पाता, तब मजबूरी में उसे लज्जा त्यागनी ही पड़ती है।

-प्रेमचंद

  • धर्म का सबसे बड़ा साधन स्वस्थ शरीर है।

-कालिदास

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  • न्याय का सिद्धांत वहां निरर्थक हो जाता है, जहां न्याय करने वालों को ही राजनीति करने की भी छूट होती है।

-विदुर नीति

  • धन और खाद एक समान हैं। उपयोगिता लेने के लिए दोनों को फैलना पड़ता है।

-बेकन

  • धोखेबाज को धोखा देने में दोगुनी प्रसन्नता का अनुभव होता है।

-लॉ फोण्टेन

  • निष्काम बौद्धिक जिज्ञासा यथार्थ सभ्यता का जीवन रस है।

-जार्ज मैकलि ट्वेन्यन

  • नासमझ को कोई भी बात आसानी से समझाई जा सकती है। समझदार को समझाना और भी आसान है, लेकिन बीच के व्यक्ति को समझाना स्वयं ब्रह्मा के भी वश की बात नहीं है।

-एनुगुलक्ष्मण कवि

  • न जानते हुए भी हम एक ही धर्म के उपासक हैं।

-वाल्टेयर

  • नीरवता की गहनता में ही ईश्वर की वाणी सुनी जा सकती है।

-सत्य सांई बाबा

  • निष्काम कर्म शक्ति का उद्गम है, चूंकि वह कर्म ही ईश्वर की पूजा है।

-महात्मा गांधी

  • नसीहत-जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वहीं सबसे अधिक लापरवाही से सुनी जाती है।

-जॉन रे

  • नौकरशाही एक भीमकाय यंत्र है, जिसे बौने चलाते हैं।

-होनराड वाल्जी

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  • नारी का निर्माण जगत को मुग्ध करने के लिए नहीं, अपने पति को सुख देने के लिए हुआ है।

-एडमंड बर्क

  • नारी की सबसे बड़ी दुश्मन नारी ही है।

-शिवानी

  • नारी के लिए उसका पति सर्वश्रेष्ठ आभूषण है। उससे पृथक रहकर वह सुंदर होते हुए और आभूषणों से सज्जित होकर भी शोभा नहीं पाती।

-वाल्मीकि

  • नारी एक ऐसा पुष्प है जो छाया में भी अपनी गंध फैलाता है।

-लैमैनिस

  • निर्धन अनुभव करना निर्धनता का सूचक है।

-इमर्सन

  • निर्धनता नहीं, निर्धनता से शर्मिंदा होना शर्म की बात है।

-बेंजामिन फ्रैंकलिन

  • प्रतिभा अपना दीपक लेकर चलती है इसी कारण अपना मार्ग स्वयं खोजती है। प्रतिभा जन्म से प्राप्त होती है। उसे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन सिखाया नहीं जा सकता।

-ड्राइव डैन


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